- वरिष्ठ पत्रकार की कलम से
Patna: बिहार में वादों की नकल का खेल हो रहा है. नीतीश की सियासत में तेजस्वी की छाया नजर आने लगी है. बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक के बाद एक बड़े ऐलान सियासी हलचल मचा रहे हैं. मुफ्त बिजली, एक करोड़ नौकरियां, और आशा-ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी जैसे फैसलों से नीतीश सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं. लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव ने इन ऐलानों को अपनी योजनाओं की नकल करार दिया है. तेजस्वी का दावा है कि नीतीश सरकार का अपना कोई विजन नहीं है और वह उनके वादों को कॉपी कर जनता के सामने परोस रही है. क्या नीतीश की सियासत वाकई तेजस्वी के आइडिया पर टिकी है?
तेजस्वी के वादे और नीतीश की नकल
तेजस्वी यादव पिछले एक साल से बिहार में नीतीश सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाओं के वादे किए, जिन्हें नीतीश सरकार ने बाद में अपने तरीके से लागू करने की कोशिश की. तेजस्वी का आरोप है कि नीतीश उनकी मांगों को आधा-अधूरा लागू कर क्रेडिट लेने की होड़ में हैं. आगे जानिए तेजस्वी ने क्या-क्या वादे किए और नीतीश ने उन्हें कैसे कॉपी किया.
महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता
तेजस्वी ने वादा किया था कि महागठबंधन की सरकार बनने पर बिहार की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इसके जवाब में नीतीश कुमार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये करने का ऐलान किया. तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा, ‘हमने 1,500 रुपये का वादा किया, तो नीतीश ने 1,100 रुपये का ऐलान कर दिया. यह साफ है कि वह हमारे वादे की नकल कर रहे हैं.’
युवाओं के लिए रोजगार
तेजस्वी ने हर साल युवाओं को नौकरी देने का वादा किया और नीतीश सरकार पर रोजगार के मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाया. इसके जवाब में नीतीश ने अगले पांच साल में एक करोड़ से अधिक नौकरियां देने का ऐलान किया. इसके अलावा, बारहवीं, आईटीआई, और स्नातक पास युवाओं को इंटर्नशिप के लिए 4,000 से 6,000 रुपये की मासिक सहायता देने की घोषणा की. तेजस्वी ने कहा, ‘हमारे रोजगार के वादे का दबाव न होता, तो नीतीश यह ऐलान न करते.’
आशा-ममता कार्यकर्ताओं का मानदेय
तेजस्वी ने अपने स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल (17 महीने) के दौरान आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की थी. उन्होंने दावा किया कि यह योजना अंतिम चरण में थी, लेकिन एनडीए सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया. अब नीतीश ने आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये और ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 300 रुपये की जगह 600 रुपये देने का ऐलान किया. तेजस्वी ने कहा, ‘यह मेरी मांग का नतीजा है. दो साल तक सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, अब चुनाव नजदीक देख मेरे वादे को लागू कर रही है.’
तेजस्वी का हमला: ‘नीतीश का विजन नहीं, सिर्फ कॉपी-पेस्ट’
तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी सरकार के पास अपना कोई विजन नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमने आशा-ममता कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और रसोइयों के मानदेय बढ़ाने की मांग की थी. अब नीतीश सरकार दबाव में आकर इन्हें लागू कर रही है, लेकिन इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है.’
तेजस्वी ने नीतीश पर तंज कसते हुए कहा, ‘जो लोग हमारे वादों का मजाक उड़ाते थे, अब सत्ता खिसकती देख छटपटा रहे हैं. नीतीश जी, अपनी अकल लगाइए, सिर्फ हमारी नकल मत करिए.’ उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी की दबाव की रणनीति ने नीतीश सरकार को जनहितकारी कदम उठाने के लिए मजबूर किया है.
नीतीश के अन्य ऐलान: तेजस्वी की प्रेरणा?
नीतीश कुमार ने हाल ही में कई अन्य बड़े ऐलान किए, जिनमें मान्यता प्राप्त पत्रकारों की पेंशन को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये, 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली, और सीतामढ़ी में मां जानकी देवी मंदिर के निर्माण का वादा शामिल है. तेजस्वी का कहना है कि ये सभी फैसले उनकी मांगों और जनता के बीच बनाए गए माहौल का परिणाम हैं.
उन्होंने कहा, ‘हमने बिहार की जनता के लिए एक रोडमैप पेश किया. नीतीश सरकार अब उसी रास्ते पर चल रही है, लेकिन आधे-अधूरे तरीके से. यह साफ है कि उनकी सियासत मेरे वादों की नकल पर टिकी है.’
कॉपी-पेस्ट पॉलिटिक्स का सियासी खेल
नीतीश कुमार के ऐलानों पर तेजस्वी का क्रेडिट लेने की कोशिश ने बिहार में सियासी जंग को और रोचक बना दिया है. तेजस्वी का कहना है कि नीतीश सरकार उनके वादों को री-पैकेज कर जनता के सामने पेश कर रही है, ताकि सत्ता में बने रहने का रास्ता बनाया जा सके. दूसरी ओर, नीतीश का दावा है कि उनकी सरकार ने हमेशा बिहार के विकास के लिए काम किया है और ये फैसले जनता के हित में हैं.
जैसे-जैसे बिहार में चुनाव नजदीक आ रहे हैं, नीतीश और तेजस्वी के बीच क्रेडिट वॉर तेज होता जा रहा है. सवाल यह है कि क्या नीतीश वाकई तेजस्वी के आइडियाज चुरा रहे हैं, या यह उनकी अपनी रणनीति का हिस्सा है? बिहार की जनता इस कॉपी-पेस्ट पॉलिटिक्स के खेल में किसे क्रेडिट देगी, यह आने वाला समय ही बताएगा.
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