आशा कार्यकर्ता को 3000, ममता को 600 रुपए मिलेंगे, तेजस्वी ने कहा- नकलची का ये डर अच्छा है

By: Hemlata Karn

On: Wednesday, July 30, 2025 11:55 AM

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Patna: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में मान्यता प्राप्त आशा कार्यकर्ता और ममता कार्यकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की घोषणा की है. कई लोगों का मानना है कि यह कदम इस वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक और रियायत है. विधानसभा चुनाव इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर में होने हैं, हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है.

सीएम नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इसकी घोषणा की है. उन्होंने लिखा है ”नवम्बर 2005 में सरकार बनने के बाद से हम लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में आशा तथा ममता कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसे ध्यान में रखते हुए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं के अहम योगदान को सम्मान देते हुए उनकी मानदेय राशि में वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. आशा कार्यकर्ताओं को अब 1 हजार रुपए की जगह 3 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी. साथ ही ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 300 रुपए की जगह 600 रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, इससे उनका मनोबल और बढ़ेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी”.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक बिहार में 90,000 से ज़्यादा आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लगभग 7,500 ममता कार्यकर्ता हैं, जो नवजात शिशुओं और उनकी माताओं की देखभाल के लिए सरकारी अस्पतालों के प्रसूति वार्डों में संविदा पर कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं. बिहार में आशा कार्यकर्ता बेहतर वेतन, मान्यता और कार्य स्थितियों के लिए लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं.

नीतीश सरकार के इस फैसले के बाद तेजस्वी यीदव ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल एक पर लिखा है “मैंने 17 महीने स्वास्थ्य मंत्री रहते आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू दी थी जो अंतिम स्टेज में थी लेकिन तब तक सरकार और मुख्यमंत्री आदतन पलटी मार गए. ये निकम्मी एनडीए सरकार उस पर भी दो साल से कुंडली मार कर बैठी रही. अब आखिरकार इन्हें आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की हमारी इस मांग के सामने भी झुकना ही पड़ा. “यहां सरकार ने चालाकी करते हुए हमारी इस मांग को पूर्णरूपेण लागू नहीं किया. इनको प्रोत्साहन राशि नहीं बल्कि मानदेय मिलना चाहिए. हम इन्हें मानदेय देंगे.”

“अब इस सरकार को आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका और रसोइयां के मानदेय में भी बढ़ोतरी करने की हमारी मांग को भी मजबूरन मानना ही पड़ेगा. हमारे 17 महीनों के अल्प कार्यकाल में ही हमने विकास मित्र, शिक्षा मित्र/टोला सेवक, तालीमी मरकज़ और पंचायती राज जनप्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ाया था. हमारी मांगों, घोषणाओं, वादों, इरादों और दावों को देखकर इस नकलची, थकी-हारी, दृष्टिहीन और विजन रहित सरकार का डर देखकर अच्छा लगता है. ये डर अच्छा है लेकिन 20 साल तक क्या ये मूंगफली छील रहे थे? यही सरकार, इनके नेता-मंत्री और अधिकारी जो हमारी घोषणा का मखौल उड़ाते थे वो अब सत्ता जाते देख दौड़ रहे है. सब कुछ तेजस्वी का ही नकल करोगे या अपनी भी अक्ल लगाओगे?”

नीतीश कुमार ने रविवार को घोषणा की थी कि राज्य सरकार जल्द ही सफाई कर्मचारियों के कल्याण और उत्थान के लिए एक सफाई कर्मचारी आयोग का गठन करेगी. इससे पहले, मतदाताओं को लुभाने के लिए एक बड़े वादे के तहत, नीतीश ने राज्य के सभी उपभोक्ताओं के लिए 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी.

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और विकलांगों सहित 1.11 करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹1,100 प्रति माह की बढ़ी हुई पेंशन राशि की पहली किस्त वितरित की और अगले पांच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की घोषणा की. उन्होंने राज्य के शिक्षा विभाग को शिक्षक भर्ती परीक्षा 4 (TRE-4) आयोजित करने के लिए सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों की गणना करने को कहा था ताकि जल्द से जल्द शिक्षकों की भर्ती की जा सके. बिहार मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण का लाभ उठाने के लिए मूल निवासी को अनिवार्य कर दिया था. इससे पहले, बिहार के बाहर की महिलाएं भी 2016 में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई आरक्षण नीति का लाभ उठा सकती थीं.

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच के लिए, उन्होंने ग्रामीण निर्माण विभाग (आरडब्ल्यूडी) के तहत बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई पहलों की शुरुआत की है, जिनकी कुल लागत ₹21,406.36 करोड़ है और इनका उद्देश्य पूरे बिहार में ग्रामीण संपर्क को बदलना है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जीविका से जुड़े सभी कर्मचारियों का मानदेय दोगुना कर दिया गया है. बिहार सरकार की 4 लाख महिला कर्मचारियों को उनके कार्यालय के पास आवास की सुविधा मिलेगी, सरकार 94 लाख गरीब परिवारों को 2-2 लाख रुपए देगी और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के प्रतिनिधियों का मासिक भत्ता डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है.

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