Noida: वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले ठगी के एक और मामला सामने आया है. नोएडा की एक 76 वर्षीय महिला से 43 लाख रुपये की ठगी की गई. ठगों ने उन्हें बताया कि उनके नंबर का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग में किया गया है, जिसमें पहलगाम हमला भी शामिल है, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे.
आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग का आरोप
नोएडा के सेक्टर 41 में रहने वाली 76 वर्षीय सरला देवी को एक व्यक्ति ने फोन किया जो खुद को पुलिस अधिकारी बता रहा था. फोन करने वाले ने उन्हें बताया कि उनके विवरण का इस्तेमाल मुंबई में बैंक खाते खोलने के लिए किया गया है, और फिर इनका इस्तेमाल आतंकवाद के फंडिंग, जुए और हवाला लेनदेन के लिए किया गया. उन्हें यह भी बताया गया कि उनके फोन नंबर का इस्तेमाल 21 अप्रैल के पहलगाम हमले सहित आतंकवादी गतिविधियों के फंडिंग के लिए किया गया था.
गिरफ्तारी वारंट का दिखाया डर
कॉल करने वाले ने सरला देवी से कहा कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया है और उन्हें जमानत के तौर पर एक रकम जमा करनी होगी, जो जांच पूरी होने पर वापस कर दी जाएगी. 20 जुलाई से 13 अगस्त के बीच, बुज़ुर्ग महिला को कई बैंक खातों में भुगतान करने के लिए क्यूआर कोड भेजे गए. उन्होंने ऐसे आठ भुगतान किए, जिनकी कुल राशि 43.70 लाख रुपये थी.
वकील से सलाह लेने पर ठगी का चला पता
पहला लेन-देन 70,000 रुपये का था और सबसे बड़ा भुगतान 11 लाख रुपये का था. जांचकर्ताओं ने पाया कि जिन बैंक खातों में भुगतान किया गया था, वे वरिंदर पाल सिंह, मदन कुमार, मंजू जनरल स्टोर और आशापुरा टी स्टॉल के नाम पर थे. एक समय तो महिला पर 15 लाख रुपये देने का दबाव डाला गया, ऐसा न करने पर उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा. शक होने पर, उसने एक वकील से सलाह ली और पाया कि वह डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हो गई है. उसने भुगतान करना बंद कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
बुजुर्ग महिला का बिगड़ी मानसिक स्थिति
पुलिस के अनुसार, इस धोखाधड़ी से बुजुर्ग महिला सदमे में है और उसने पुलिस से गुहार लगाई है कि उसके पैसे वापस दिलाए जाएं और दोषियों को कड़ी सजा मिले. नोएडा पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने शिकायत दर्ज कर ली है और अब धोखाधड़ी के पीछे छिपे लोगों का पता लगाने के लिए लेन-देन की जांच कर रही है. डिजिटल गिरफ्तारी जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं और बुजुर्ग नागरिक धोखेबाजों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बनकर उभरे हैं. ऐसे लोग तकनीक से बहुत परिचित नहीं होते और अक्सर ऐसी परिस्थितियों में घबरा जाते हैं. फिर धोखेबाज उन्हें अपने जाल में फंसाकर उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी लूट लेते हैं.
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