- संवाददाता- वीरेंद्र कुमार
Nalanda: नालंदा में नगर पंचायत की मनमानी वसूली पर बवाल मचा हुआ है. फुटपाथ विक्रेताओं ने इसे लेकर विरोध जताया है. नालंदा जिला के नगर पंचायत अस्थावां द्वारा अचानक शुरू की गई दैनिक शुल्क वसूली को लेकर बाजार क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है. फुटपाथ पर सब्जी, फल, चाय-नाश्ता और अन्य अस्थायी दुकानें लगाने वाले विक्रेताओं से प्रतिदिन ₹20 से ₹30 तक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय दुकानदारों में भारी रोष है.
दुकानदार विरोध करते हुए कहते हैं कि कभी ऐसा नहीं हुआ, आज अचानक पैसा क्यों मांगा जा रहा है? जबकि वसूली करने वाला कर्मी रसीद दिखाकर दबाव बनाता नजर आ रहा है.
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि न तो कोई सूचना जारी की गई, न ही कोई बैठक बुलाई गई, और न ही उन्हें कोई लिखित आदेश या नोटिस मिला. केवल दुकान के प्रकारों की सूची तैयार की गई और उसी आधार पर वसूली शुरू कर दी गई है.
एक सब्जी विक्रेता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमसे ₹20 से ₹30 रोजाना मांगा जा रहा है. जब कारण पूछा तो जवाब मिला कि ऊपर से आदेश है. लेकिन वह आदेश कहां है, किसका है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है.
व्यापारियों का सवाल है कि जब तक किसी नई व्यवस्था की जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी जाती, तब तक उस पर अमल कैसे संभव है? दुकानदारों ने इस वसूली को पूरी तरह से अव्यवस्थित और अन्यायपूर्ण बताया है.
फुटपाथ दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया है कि नगर पंचायत की ओर से उन्हें न तो सफाई की सुविधा दी गई है, न शौचालय, न जल निकासी की व्यवस्था और न ही कोई छाया या सुरक्षा का इंतजाम. इसके बावजूद रोजाना शुल्क मांगना अनुचित है.
बाजार क्षेत्र में बढ़ते विरोध के बीच अब तक नगर पंचायत की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इससे नाराज दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि यह वसूली तत्काल प्रभाव से बंद नहीं हुई या कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सार्वजनिक नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे.
नगर प्रशासन की चुप्पी और बिना पूर्व सूचना के वसूली की शुरुआत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है और फुटपाथ दुकानदारों की शिकायतों का समाधान कैसे करता है.
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