जेल से शरजील इमाम लड़ेंगे बिहार चुनाव, किशनगंज की इस सीट से भरेंगे हुंकार, दिल्ली दंगा के हैं आरोपी

By: Hemlata Karn

On: Thursday, July 31, 2025 10:51 AM

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New Delhi: जेल से शरजील इमाम लड़ेंगे बिहार चुनाव. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शोधार्थी और CAA विरोधी प्रदर्शनों में एक प्रमुख भूमिका निभाने वाले शरजील इमाम आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. उनके वकील अहमद इब्राहिम के अनुसार जनवरी 2020 से जेल में बंद शरजील इमाम किशनगंज जिले के बहादुरगंज निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं.

CAA-NRC विरोधी प्रदर्शन से हुए पोपुलर

यह सीट वर्तमान में मोहम्मद अंजार नईमी के पास है, जो 2020 में AIMIM के टिकट पर चुने गए थे, लेकिन बाद में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए. बिहार के जहानाबाद के काको गांव के मूल निवासी, 35 वर्षीय इमाम ने 2020 की शुरुआत में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि प्राप्त की.

28 जनवरी 2020 से हैं जेल में

उन्हें 28 जनवरी, 2020 को राजद्रोह के आरोपों और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने और सड़क जाम करने का आह्वान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

दिल्ली दंगा मामले में नहीं मिल रही जमानत

फरवरी 2020 में पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थकों और इसका विरोध करने वालों के बीच झड़पें हुईं. इस हिंसा में 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. हालांकि इमाम को विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज सात में से छह मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन वह यूएपीए के तहत दिल्ली हिंसा की साज़िश के एक मामले में अभी भी जेल में हैं. उनकी जमानत याचिका लगभग तीन साल से लंबित है. संयुक्त राष्ट्र ने उनकी लंबी नजरबंदी पर चिंता व्यक्त की है और इसे असहमति को दबाने का प्रयास बताया है.

जेल से लिखा भावुक पत्र

जेल से लिखे एक पत्र में, इमाम ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझ पर आतंकवाद का आरोप लगाया जाएगा—खासकर उन दंगों के लिए जो मेरी गिरफ्तारी के एक महीने बाद हुए थे.” उन्होंने अपनी बुजुर्ग मां से अलग होने के अपने भावनात्मक दर्द को भी व्यक्त किया.

सोशल मीडिया पर चल रहा है कैंपेन

सोशल मीडिया पर बढ़ते समर्थन के साथ, इमाम का अभियान पहले से ही गति पकड़ रहा है. संदेशों में उन्हें प्रतिरोध का प्रतीक बताया जा रहा है, एक पोस्ट में लिखा है, “शरजील इमाम सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं.” बिहार विधानसभा चुनाव इसी साल अक्टूबर या नवंबर में होने की उम्मीद है.

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