- संवाददाता- वीरेंद्र कुमार
Nalanda: बिहार में विकास के दावों की हकीकत नालंदा जिले के अस्थावां नगर पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या-8 स्थित नन्नू बीघा गांव में साफ दिखाई देती है. आजादी के 79 साल बाद भी यह गांव पक्की सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. गांव की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों का गुस्सा अब फूट पड़ा है.
कीचड़ से होकर चलना मजबूरी
ग्रामीण शम्मी कुमार, नीतीश कुमार, सुधीर प्रसाद, इंदु देवी, सरला देवी, रंजू देवी, सूबे महतो, अर्जुन प्रसाद समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि कई पीढ़ियां इसी गांव में बीतीं, लेकिन आज तक कोई ठोस विकास नहीं हुआ. बरसात के मौसम में गलियां कीचड़ और जलजमाव से भर जाती हैं. आम दिनों में भी कच्ची सड़कें इतनी खराब हैं कि चलना मुश्किल हो जाता है.

पढ़ाई पर पड़ रहा असर
छात्रा रिया कुमारी और छात्र संदीप कुमार ने बताया कि कच्ची सड़क की हालत इतनी खराब है कि स्कूल की गाड़ी गांव तक नहीं आती. मजबूरी में पैदल जाना पड़ता है, जहां अक्सर कीचड़ में फिसलकर गिर जाते हैं. गंदा होकर स्कूल जाने पर शिक्षक डांटते हैं और घर लौटने पर भी डांट खानी पड़ती है. इससे बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है.

बदल देंगे विधायक
ग्रामीणों का कहना है कि जदयू विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार तीन बार से विधायक बने हैं, लेकिन नन्नू बीघा की तस्वीर नहीं बदली. हर बार चुनाव में आश्वासन तो मिलता है, लेकिन चुनाव के बाद सब कुछ भुला दिया जाता है. अब गांववालों ने दो टूक कह दिया है, अगर जल्द सड़क और नाली का निर्माण नहीं हुआ, तो इस बार नया चेहरा चुनेंगे. अब सिर्फ वादा नहीं, काम देखकर मिलेगा वोट.
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