Patna: राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाषा की मर्यादा को तार-तार कर दिया. उन्होंने मीडिया के सूत्र के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की है. उन्होंने पत्रकारों के पूछे गए सवाल पर कहा कि हम सूत्र को हम मूत्र समझते हैं. महागठबंधन की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए तेजस्वी यादव चुनाव आयोग को मिली उन सूचनाओं पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें कथित तौर पर कहा गया था कि राज्य में बांग्लादेश और नेपाल से आए फर्जी मतदाता मौजूद हैं.
मीडिया के सूत्र को मूत्र समझते हैं
पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर तेजस्वी यादव ने पूछा कि आप लोगों के पास ये जानकारी कहां से आई है. चुनाव आयोग की तरफ से कोई बयान जारी किया गया है, या फिर कोई पत्र जारी किया गया है. इस पर पत्रकारों ने कहा कि सूत्रों से जानकारी मिल रही है. इस पर तेजस्वी यादव ने कहा कि हम उस सूत्र को मूत्र समझते हैं. उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता पर सवाल उठाया और इस प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाया.
चुनाव आयोग के फॉर्म पर जलेबी खा रहे लोग
चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में जारी एक प्रेस नोट का हवाला देते हुए, जिसमें दावा किया गया था कि बिहार में 80 प्रतिशत मतदाता फॉर्म जमा हो चुके हैं, यादव ने कहा कि मेरा अपना फॉर्म भी अभी तक जमा नहीं हुआ है. फॉर्म इधर-उधर फेंके जा रहे हैं, और कुछ जगहों पर तो इनका इस्तेमाल जलेबी बेचने के लिए भी किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इससे मतदाताओं और बीएलओ, दोनों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है.
पोर्टल पर आ रही कई दिक्कतें
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का कहना है कि दस्तावेज बाद में जमा किए जा सकते हैं, लेकिन कोई आधिकारिक एसओपी जारी नहीं किया गया है. सर्वर की समस्याएं हैं, ओटीपी की समस्याएं हैं और तकनीकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है. ऐसा लगता है कि यह पूरी कवायद एक दिखावा है. उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग भाजपा के निर्देशों पर काम कर रहा है.
कट सकते हैं लाखों वोटर के नाम
उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता सूची से एक प्रतिशत मतदाताओं को बाहर करने से बिहार में लगभग 7.9 लाख मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि पिछली बार 52 सीटों पर जीत का अंतर मात्र 5,000 वोटों का था. अगर यही स्थिति रही तो हर निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 3,200 वोट कट सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार से बाहर गए मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं.
मुकेश सहनी ने भी उठाए सवाल
महागठबंधन के एक अन्य नेता मुकेश सहनी ने भी पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मैं पटना में बैठा हूं, लेकिन मैंने अपने गृह क्षेत्र के बीएलओ को अपना फॉर्म सिर्फ सच्चाई की जांच के लिए जमा किया था. उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना नोटबंदी से की और इसे “वोटबंदी” बताया और चुनाव आयोग से गरीब मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया.
सूत्र को मूत्र बताया
एक प्रेस वार्ता के दौरान, जब एक पत्रकार ने मतदाता सूची में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी के बारे में पूछा तो तेजस्वी यादव ने अपना बयान दोहराया. जब पत्रकार ने कहा कि यह जानकारी सूत्रों से मिली है, तो तेजस्वी यादव ने जवाब दिया कि हम ऐसे सूत्रों को मूत्र मानते हैं. इसका कोई आधार नहीं है, और उन्होंने एक्स पर इस बातचीत का एक वीडियो शेयर किया.
25 जून से चुनाव आयोग का अभियान
चुनाव आयोग ने बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की नागरिकता की स्थिति सत्यापित करने के लिए 25 जून को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू किया. 77,000 से ज्यादा बीएलओ और सरकारी कर्मचारी वर्तमान में 7.8 करोड़ मतदाताओं की पहचान सत्यापित कर रहे हैं.
कई और राज्य में चलेंगे ये अभियान
सूत्रों ने दावा किया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के लोग बिहार में रह रहे पाए गए हैं. अधिकारियों ने कहा है कि उचित सत्यापन के बाद, 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल नहीं किए जाएंगे. चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि आगामी चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे अन्य राज्यों में भी इसी तरह का सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा.
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