New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में बिहार में मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई. बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण: चुनाव आयोग ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. चुनाव आयोग ने यह टिप्पणी अदालत के उस सवाल का जवाब देते हुए की जिसमें पूछा गया था कि बिहार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम से आधार को क्यों बाहर रखा गया.
इन अधिवक्ताओं ने पेश की दलील
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की आंशिक कार्य दिवस (पीडब्ल्यूडी) पीठ ने की. वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और केके वेणु गोपाल ने पक्ष रखा. चुनाव आयोग की ओर से मनिंदर सिंह ने पक्ष रखा. एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन उपस्थित हुए.
10 जुलाई की सुनवाई में विवाद का विषय चुनाव आयोग के 24 जून के निर्देश का प्रावधान था, जिसमें बिहार के एक बड़े वर्ग के लोगों से 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने को कहा गया था.
कोर्ट में आयोग ने दी ये दलील
बिहार में आखिरी ‘गहन पुनरीक्षण’ 2003 में हुआ था. चुनाव आयोग ने कहा कि जिन लोगों के नाम 2003 तक मतदाता सूची में थे, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उस समय विस्तृत पुनरीक्षण हुआ था.
हालांकि, अन्य लोगों (जिनका नामांकन 2003 के बाद हुआ है) को अपनी जन्मतिथि और/या जन्मस्थान स्थापित करने के लिए 11 दस्तावेजों की सूची में से एक या एक से ज़्यादा दस्तावेज़ (मौजूदा मतदाताओं के लिए पहले से भरे हुए गणना प्रपत्र के साथ) जमा करने होंगे, जिनका इस्तेमाल नागरिकता निर्धारित करने के लिए किया जाता है.
आयोग ने कहा कि जिनका नाम 2003 की सूची में नहीं है, उन्हें अपनी जन्मतिथि के अनुसार जन्मतिथि/जन्मस्थान के लिए निम्नानुसार दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्तियों को स्वयं के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, 1 जुलाई 1987 और 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्तियों को स्वयं और एक माता-पिता के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्तियों को स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में संशोधन के समय पर सवाल उठाया. अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि अगर वह बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर के तहत नागरिकता की जांच करना चाहता था, तो उसे पहले ही कदम उठाना चाहिए था. अदालत ने कथित तौर पर कहा क्या अब इसके लिए बहुत देर नहीं हो गई है?
आपके द्वारा मतदाता सूची में गैर-नागरिकों के नाम न रह जाएं, यह सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच-पड़ताल में मतदाता सूची को शुद्ध करने में कुछ भी गलत नहीं है. लेकिन अगर आप प्रस्तावित चुनाव से कुछ महीने पहले ही यह फैसला लेते हैं…
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में आप नागरिकता के मुद्दे पर क्यों आ रहे हैं, यह गृह मंत्रालय का अधिकार क्षेत्र है. चुनाव आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत भारत में मतदाता बनने के लिए नागरिकता की जांच जरूरी है. इसके बाद अदालत ने पूछा कि क्या अब इसके लिए बहुत दे नहीं हो गई है.
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