- संवाददाता- वीरेंद्र कुमार
Nalanda: राजद विधायक राकेश रौशन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं. अपने पैतृक गांव सकरी पंचायत स्थित नवाबगंज में आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक ने दावा किया कि मतदाता सूची से दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीब तबके के लोगों के नाम सुनियोजित ढंग से हटाए जा रहे हैं.
प्रक्रिया न पारदर्शी न निष्पक्ष
उन्होंने कहा कि एक गहरी राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की मंशा से यह सब किया जा रहा है. विधायक ने कहा कि आयोग द्वारा 25 जून को जारी आदेश के तहत बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन करना था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया न तो पारदर्शी है और न ही निष्पक्ष. जिन लोगों को सूची में बने रहने का संवैधानिक अधिकार है, उनसे जीवित होने का प्रमाण मांगा जा रहा है, जबकि मृत लोगों के नाम हटाने में कोई प्रमाणपत्र नहीं लिया जाता.
लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश
राकेश रौशन ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि अगर यही रवैया जारी रहा, तो बड़ी संख्या में कमजोर वर्ग के लोगों का मताधिकार छीन लिया जाएगा. उन्होंने निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष और पारदर्शी पुनरीक्षण सुनिश्चित करने की मांग की.
कानून व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान विधायक ने बिहार की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि इसलामपुर में हाल ही में एक साइकिल दुकानदार के घर पर डकैती की कोशिश की गई, जिसमें अपराधियों ने परिजनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया. घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गई महिला की जान
विधायक ने कहा कि महरोगौरैया गांव की महिला राधा देवी की मौत को सरकारी उदासीनता का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि सांप काटने के बाद पीड़िता को समय पर एंटी-स्नेक वैक्सीन नहीं दी गई, जबकि स्वास्थ्य केंद्र में दवा उपलब्ध थी. यह सीधी-सीधी लापरवाही है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार कर्मी पर कार्रवाई नहीं हुई.
प्रेस वार्ता में पंचायत के मुखिया युगेश्वर प्रसाद यादव, विधायक प्रतिनिधि उपेंद्र यादव, किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रंजीत यादव, टिंकू यादव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे.
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