- संवाददाता- वीरेंद्र कुमार
Nalanda: भूमिहीन दलित परिवार को गैरमजरूआ जमीन से बेदखल करने की एक खबर है. दलित ने अधिकारियों पर रिश्वत लेने और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाया है. नालंदा जिले के रहुई थाना क्षेत्र अंतर्गत फतेहपुर गांव में भूमि विवाद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई सवालों के घेरे में है. गांव के वार्ड संख्या 8 निवासी महेश पासवान ने आरोप लगाया है कि थानाध्यक्ष और अंचल अधिकारी की मिलीभगत से उसे गैरमजरूआ जमीन से जबरन बेदखल कर दिया गया. पीड़ित के अनुसार वह वर्ष 1998 से 5 डिसमिल सरकारी जमीन पर झोपड़ीनुमा आवास बनाकर रह रहा था.
महेश पासवान का कहना है कि फतेहपुर के कोरिया पोखर क्षेत्र में स्थित कुल 95 डिसमिल गैरमजरूआ जमीन में से 5 डिसमिल भूमि पर वह अपने परिवार के साथ बीते 25 वर्षों से निवास कर रहा था. इस भूमि को उसने रैन बसेरा योजना के अंतर्गत प्राप्त बताया है. आरोप है कि गांव के ही तीन प्रभावशाली व्यक्तियों, सरयू महतो, नवल महतो और शरण महतो के पुत्र द्वारा उक्त जमीन पर जबरन भवन निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत है.

पीड़ित ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भवन निर्माण की अनुमति दिलाने के एवज में उक्त लोगों द्वारा थानाध्यक्ष और अंचलाधिकारी को मोटी रकम की रिश्वत दी गई है. महेश ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध जताने पर थानाध्यक्ष ने उसे जातिसूचक गालियां दीं और पुलिस बल के सहयोग से जबरन जमीन खाली करवा दी गई.
महेश पासवान ने बताया कि विवादित जमीन पर संत कबीर साहेब की एक मूर्ति भी स्थापित थी, जिसे हटाने की धमकी दी जा रही है. मामले को लेकर पीड़ित ने अनुमंडल कार्यालय, एससी/एसटी थाने और न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए जमीन की सरकारी मापी कराने की मांग की है.
प्रशासन का पक्ष:
इस पूरे मामले पर रहुई अंचलाधिकारी मनोज प्रसाद ने सभी आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि जमीन सरकारी है. थानाध्यक्ष और अन्य अधिकारियों पर लगे आरोप निराधार बताया है.
ये भी पढ़ें-
नालंदा में एएसआई जमीन छोड़ने का दबाव बना रहे, पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार






