- संवाददाता- फिरोज अहमद
Darbhanga: डॉ. उस्मानी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला है. मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत दरभंगा में 2,03,315 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. यह आंकड़ा चिंताजनक ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है.
रिपोर्टों के अनुसार, बिहार भर में करीब 65 लाख वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या उन तबकों की है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं दलित, अल्पसंख्यक, प्रवासी मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग.
सामाजिक कार्यकर्ता और नेता डॉ. उस्मानी ने कहा कि अनेक मामलों में पहले से रजिस्टर्ड मतदाताओं को बिना किसी पूर्व सूचना या गलती के बाहर कर दिया गया है. पहचान पत्र (जैसे आधार, राशन कार्ड, पासबुक) के होते हुए भी उन्हें “अपात्र” करार दिया गया.
उन्होंने कहा कि पहले भी कहा है कि ये पूरा अभियान एक राजनीतिक रणनीति के तहत संचालित हो रहा है. ताकि वोटिंग से पहले ही उन वर्गों को निष्क्रिय किया जा सके जो सत्ता पक्ष के लिए असहज हैं. यह चुनावी प्रक्रिया नहीं, लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है और पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र के खिलाफ सुनियोजित हमला है.
डॉ. उस्मानी ने कहा कि यह केवल वोटरों की सूची नहीं, जनता की आवाज से छेड़छाड़ है. भाजपा जानती है कि चुनाव वो नहीं जीत सकती, इसलिए अब वोटरों को ही सूची से हटवा दिया है. और चुनाव आयोग, जो संविधान की रक्षा के लिए जिम्मेदार है, अब सत्ता के इशारे पर काम करता दिख रहा है.
उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर इस प्रक्रिया की पारदर्शिता बहाल नहीं की गई और सभी हटाए गए वोटरों को तुरंत सूची में वापस नहीं जोड़ा गया, तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर दरभंगा समेत बिहार भर में आंदोलन करेगी.
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