Patna: शुक्रवार को कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने साफ कर दिया कि महागठबंधन में तेजस्वी यादव के सीएम चेहरा पर कोई भ्रम नहीं है. कन्हैया कुमार ने कहा कि अगर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को बहुमत मिलता है, तो मुख्यमंत्री राजद से होगा.
मुद्दा से भटकाने की कोशिश
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव सीएम पद के लिए मुख्य चेहरा होंगे, इस पर कोई भ्रम या विवाद नहीं है. हालांकि उन्होंने कहा कि चुनाव में मुद्दे सर्वोपरि होंगे और गठबंधन के सीएम चेहरे का मुद्दा उठाकर प्रतिद्वंद्वियों द्वारा ध्यान भटकाने की साजिश की जा रही है.
मौके मिलते ही नीतीश को हटा देगी बीजेपी
उन्होंने दावा किया कि जैसे ही भाजपा को मौका मिलेगा वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर उनकी जगह बिहार में अपने नेता को सीएम बना देगी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी पुरानी रणनीति पर चल रही है. पहले किसी क्षेत्रीय पार्टी का समर्थन लेना और फिर उसे धीरे-धीरे निगल जाना.
ऑपरेशन सिंदूर पर राजनीति नहीं
उन्होंने दावा किया कि बिहार में पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में परिवर्तन की हवा अधिक मजबूत है और भाजपा ऑपरेशन सिंदूर को चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं उठा रही है क्योंकि वह जानती है कि बिहार के लोग इसका नकारात्मक जवाब देंगे क्योंकि उनका मानना है कि यह देश के सम्मान का मामला है और किसी भी पार्टी को इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए.
महागठबंधन में सभी पार्टी का अपना रोल
कन्हैया कुमार ने कहा कि यदि आप एक कार को देखते हैं, तो क्लच ब्रेक और रियरव्यू मिरर जितना ही महत्वपूर्ण है. इसी तरह महागठबंधन में भी सभी पार्टियों का अपना रोल है. यह सच है कि आरजेडी बड़ी पार्टी है, उसके पास अधिक विधायक हैं, यह महागठबंधन को नेतृत्व प्रदान करता है, उनके पास विपक्ष के नेता का पद है. स्वाभाविक रूप से, यह उनकी जिम्मेदारी है.
सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं
उन्होंने कहा कि आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल और सहनी जी की पार्टी सभी मिलकर 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. अगर गठबंधन स्वाभाविक और मुद्दों पर आधारित है तो यह हमारी और आपकी सीटों का मामला नहीं है. हम सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे. जिसकी बड़ी जिम्मेदारी है, वह उसे निभाएगा और जिसकी छोटी जिम्मेदारी है, उसे निभाना भी जरूरी है.
बदलाव के लिए वोट करेगी जनता
कन्हैया कुमार ने महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने का भरोसा जताते हुए कुमार ने कहा कि बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, किसान, परीक्षाओं में धांधली और खराब स्वास्थ्य ढांचे के मुद्दे सर्वोपरि हैं. उन्हें उम्मीद है कि लोग बदलाव के लिए वोट करेंगे क्योंकि सरकार अब नौकरशाहों द्वारा “तानाशाही तरीके” से चलाई जा रही है.
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