Patna: बिहार विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं. ऐसे में राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए दांव और चाल चल रहे हैं. कोई कुछ वादा कर रहा है तो कोई कुछ और दावा कर रहा है. इस बीच नीतीश कुमार ने बड़ा दाव खेल दिया है. नीतीश कुमार ने 15 प्रतिशत वोट पक्का करने का दांव चुनाव से ठीक पहले खेल दिया है.
सवर्ण आयोग का गठन
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सवर्ण आयोग का गठन कर दिया है. बीजेपी नेता महाचंद्र प्रसाद को अध्यक्ष और जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद को उपाध्यक्ष बनाया गया है. दयानंद राय, जय कृष्ण झा और राजकुमार सिंह को सदस्य बनाया गया है. नीतीश कुमार ने इससे पहले 2011 में सवर्ण आयोग का गठन किया था.
2020 में 71 से 43 तक पहुंचा
2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जेडूयी ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन मात्र 43 सीटों पर ही जीत हासिल हुई. उससे पहले के चुनाव में यानी 2015 में 101 सीटों पर चुनाव लड़कर जेडीयू ने 71 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2020 चुनाव में नीतीश की पार्टी की स्थिति खराब होने की वजह सवर्ण वोटर का छिटकना माना जाता है. कहा जाता है कि उस चुनाव में चिराग पासवान ने नीतीश के कैंडिडेट के खिलाफ अधिकतर सीटों पर सवर्ण कैंडिडेट दिए. जिस वजह से जेडीयू 71 से 43 पर पहुंच गई.
लोकसभा चुनाव में जारी रही नाराजगी
लोकसभा चुनाव 2024 की बात करें तो इसमें भी नीतीश कुमार की पार्टी को सवर्ण वोटर की नाराजगी झेलनी पड़ी. जहानाबाद जैसे भूमिहार बहुल सीट हार गई. पूर्णिया में पप्पू यादव जीत गए, यही स्थिति कटिहार में रही, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार को सवर्णों का अधिक वोट मिला. लोकसभा चुनाव में जेडीयू को जिन सीटों पर जीत मिली वहां मार्जिन काफी कम रहा. इसलिए अगड़ी जातियों की नाराजगी को कम करने के लिए सवर्ण आयोग का गठन किया गया है.
2024 लोकसभा चुनाव के बाद से ही हो रही कोशिश
वैसे तो नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव के बाद से ही जातीय समीकरण बिठाने और सवर्णों की नाराजगी को कम करने की कोशिश में लगे हैं. पहले मोदी सरकार में भूमिहार जाति के ललन सिंह को मंत्री बनाया फिर ब्राह्मण जाति के संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया और अब सवर्ण आयोग का गठन कर बड़ा दाव खेल दिया है.
सवर्ण दूसरे वोट को कर सकते हैं प्रभावित
बिहार विधानसभा में सवर्णों की भागीदारी की बात करें तो 2020 के चुनाव में 64 विधायक अगड़ी जाति से जीतकर आए. जिसमें से ब्राह्मण जाति के 12, राजपूत जाति से 28, भूमिहार जाति से 21 और कायस्थ जाति से 3 विधायक विधानसभा पहुंचे. पिछले दिनों हुए जातीय सर्वे की बात करें तो सवर्ण 15.56 प्रतिशत हैं. जिसमें से 25 प्रतिशत सवर्ण गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करते हैं. इनके जीवन स्तर को सुधारने में यह सवर्ण आयोग मदद कर सकता है.
डैमेज कंट्रोल की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए को अगर 2025 विधानसभा चुनाव 225 सीट जीतना है तो सवर्णों की नाराजगी को पाटना होगा. पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने नीतीश के उम्मीदवार के खिलाफ अधिकतर सीटों पर अपर कास्ट के उम्मीदवार दिए, जिस वजह से नीतीश कुमार से अपर कास्ट छिटक गया. अब नीतीश कुमार डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी के तहत सवर्ण आयोग के गठन का दाव खेला है. इसका चुनाव में कितना फायदा होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.






