Patna: बिहार की राजनीति में इन दिनों दो दोस्ती की चर्चा काफी तेजी से चल रही है. ये दोनों दोस्ती वाले जोड़े पांच साल पहले तक पानी पी-पीकर एक दूसरे को कोसते थे. आज एक दूसरे का हाथ पकड़कर चल रहे हैं. आगे भी साथ-साथ चलने की कसमें खा रहे हैं. गिले सिकवे भुलाकर गले मिल रहे हैं. साथ-साथ फोटो खिंचवा रहे हैं, फोटो को सोशल मीडिया पर अपलोड भी करवा रहे हैं. भाई राजनीति है, यह सब चलता है.
2020 में थे अलग-अलग अब हैं साथ
हम बात कर रहे हैं, चिराग पासवान और नीतीश कुमार की दोस्ती, प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह की दोस्ती की. बिहार की राजनीति में पिछले दो दिनों से तस्वीर सामने आई है. उसमें इन दोनों दोस्ती की चर्चा काफी हो रही है. क्योंकि ये लोग कुछ साल पहले तक या यूं कहें कि पिछले विधानसभा चुनाव में एक दूसरे के धूर विरोधी हुआ करते थे. अब 2025 बिहार विधानसभा चुनाव साथ लड़ने की तैयारी में हैं.
चिराग ने कर दी थी नीतीश की हालत पतली
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान एनडीए से अलग हो गए. चिराग पासवान नीतीश कुमार को सबक सिखाने की कसम खा कर उनकी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे. चिराग पासवान की पार्टी को तो बस एक सीट पर जीत मिली लेकिन उनकी पार्टी ने नीतीश को बड़ा नुकसान कर दिया. नीतीश कुमार की पार्टी महज 43 सीट पर सिमट गई. मतलब नीतीश की पार्टी बिहार में तीसरे नंबर पर पहुंच गई. इस दौरान चिराग पासवान नीतीश कुमार के खिलाफ लगातार आग उगलते रहे. जेल तक पहुंचाने की बात करते दिखे. वहीं, नीतीश कुमार भी उनके पिता की दूसरी शादी का जिक्र कर उनकी दुखती रग को दबा गए. रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी दूसरी शादी का जिक्र करना एक सीएम को शोभा नहीं देता है, कुछ इसी तरह का रिएक्शन चिराग का रहा था.
अब चिराग नीतीश को सीएम बनाने के लिए कर रहे काम
अब एक बार फिर चुनाव सिर पर है. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ और सामने आ रही है. चिराग पासवान नीतीश कुमार को फिर से सीएम बनाने की बात कर रहे हैं. उनके नेतृत्व को स्वीकार कर रहे हैं. उनके आवास पर जाकर उनसे मुलाकात कर रहे हैं. नीतीश कुमार भी गर्मजोशी के साथ मिल रहे हैं, फोटो खिंचा रहे हैं और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड भी कर रहे हैं. यह दिखाने की कोशिश हो रही है कि दोनों एक साथ दिल मिलाकर काम कर रहे हैं.
आरसीपी-पीके के बीच था 36 का आंकड़ा
वहीं, जब आरसीपी सिंह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. उस वक्त प्रशांत किशोर की एंट्री भी जेडीयू में हुई. दोनों को मिलकर पार्टी को ऊपर ले जाना था लेकिन दोनों के काम करने का तरीका अलग-अलग था. दोनों के बीच अनबन की खबरें लगातार आती रही. दोनों ही अपने तरीके से जेडीयू को चलाने की कोशिश करने लगे, जो नीतीश को पसंद नहीं आया और फिर नौबत यहां तक आ गई कि जेडीयू ने दोनों से किनारा कर लिया.
अब मिल रहे हैं गले
अब जो तस्वीर सामने आ रही है. उसमें दोनों साथ दिख रहे हैं. एक साथ एक पार्टी में काम करने के लिए तैयार हैं. कभी दोनों नीतीश को सीएम और पीएम बनाने के लिए काम कर रहे थे. अब दोनों नीतीश को सीएम पद से हटाने के लिए काम कर रहे हैं. आरसीपी सिंह जेडीयू से निकलने के बाद पहले बीजेपी का इंतजार किया, जब बीजेपी से भाव नहीं मिला तो फिर अपनी पार्टी बनाई. अपनी पार्टी को स्थापित नहीं कर पाए तो फिर सियासी मजबूरी में अपनी पार्टी का विलय प्रशांत किशोर की जन सुराज में कर दिया. राजनीति चीज है ऐसी है जिसमें दिल मिले ना मिले साथ तस्वीर खिंचवानी पड़ती है. साथ मिलकर काम करना पड़ता है. क्या दोनों दोस्ती जिसकी चर्चा बिहार की राजनीतिक गलियारों में चल रही है, वह भी सियासी मजबूरी की दोस्ती है. आप सब समझदार हैं, समझ सकते हैं.






