- संवाददाता- प्रभात ठाकुर
Madhubani: विधानसभा चुनाव की सरगर्मी राज्य के अन्य हिस्सों की तरह मिथिलांचल में भी बढ़ गई है. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित मधुबनी जिले में दो लोकसभा व दस विधानसभा क्षेत्र हैं. विधानसभा चुनाव के लिए, इन दस विधानसभा क्षेत्रों के लिए सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो चुके हैं. वैसे भी बिहार में चुनाव मुख्य रूप से जातीय फैक्टर पर लड़ी जाती है.
जिले में मधुबनी, राजनगर सुरक्षित, खजौली, हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, झंझारपूर, बाबूबरही, फुलपरास, लौकहा विधानसभा क्षेत्र हैं. सभी दलों में जातीय समीकरण के दावों के साथ उम्मीदवारी के दावे किये जा रहे हैं. इन विधानसभा क्षेत्रों में खजौली विधानसभा में राजपूतों की संख्या अच्छी खासी है. इस विधानसभा क्षेत्र में जयनगर, बासोपट्टी व खजौली प्रखंड का पश्चिमी भाग आता है.
जहां नरार पूर्वी, ठाहर, तारापट्टी, जयनगर, दतुआर, शिलानाथ, सतेर, डरहा, मंगती, सेलीबेली, दुलीपट्टी, चचराहा, उछाल, मेघवाड़ी, छतौनी, कुवार, धमियापट्टी, महुआ जैसे गांवों व पंचायतों में राजपूत समुदाय की आबादी अधिक है. वे इस विधानसभा में डिसाईडिंग फैक्टर हैं. जिसके कारण न केवल कांग्रेस में बल्कि जदयू में भी इस सीट को लेकर, इस समुदाय की ओर से दावेदारी की जा रही है.
इस क्षेत्र से आजादी के बाद से 1975 तक इस समुदाय का विधानसभा व लोकसभा में लगातार प्रतिनिधित्व रहा है. 1952-1957 में अनिरूद्ध सिंह एमपी हुये दो बार 11957 में अर्जुन सिंह, विधायक हुये, 1969 में नर्मदेश्वर सिंह आजाद खजौली से विधायक बने, 1962, 1969, 1972 में शहीद सूरज नारायण सिंह, विधायक रहे. महाबल कुंवर, विधायक जयनगर से. लेकिन चार दशकों से इस समुदाय को सभी दलों ने ठगा है. जदयू के राज्य परिषद सदस्य व युवा नेता डॉ. मृणाल कांत सिंह मून ने जदयू में खजौली से अपनी दावेदारी पेश की है, ताकि जिले में इस समुदाय को भी प्रतिनिधित्व मिल सके.
ये भी पढ़ें-
चुनावी घोषणा के साथ ही महागठबंधन को बड़ा झटका, मधुबनी के सीनियर लीडर संजय मिश्रा बने जन सुराजी






