- रिपोर्ट- विकास कुमार
Saharsa: योग व्यायाम के प्रति समर्पित एवं अलख जगाने वाले योग के ध्वजवाहक आचार्य प्रभाकर द्वारा प्रत्येक पूर्णिमा को चरण पादुका पांव पैदल यात्रा निकाली जाती है. उसी क्रम में खजूरी से परसरमा धाम तक बुधवार को चरण पादुका खड़ाऊ यात्रा निकाली गई.
यह यात्रा सुबह 4:00 बजे निकली जो 32 किलोमीटर बाबा जी के भजन गाते हुए परसरमा धाम पहुंचकर मुख्य पुजारी दिनेश बाबा को खड़ाऊ समर्पित किया. आचार्य ने बताया कि मिथिला के महान सिद्ध साधक संत शिरोमणि लक्ष्मीनाथ गोसाई का जन्म में सुपौल जिले की परसरमा में हुआ लेकिन उनका कार्यक्षेत्र बनगांव ही रहा. वैसे तो लक्ष्मी नाथ गोसाई के जगह-जगह अनेक कुटी बने हुए हैं लेकिन बनगांव कुटी से बाबा जी को विशेष लगाव रहा.
उन्होंने अपने योग साधना से अष्ट सिद्धि नवनिधि की प्राप्ति की. वहीं वह लोगों को योग व्यायाम सादा जीवन एवं धर्म के प्रति सदैव प्रेरित किया. वे जीवन पर्यत खड़ाऊ का ही धारण किया. उनके प्रत्येक कुटी पर खड़ाऊ रखा गया है. उन्होंने कहा कि खड़ाऊ पहनने से शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति होती है. इसकी महिमा को रेखांकित एवं उजागर करने के लिए प्रत्येक पूर्णिमा को खड़ाऊ पदयात्रा निकाली जाती है.
आचार्य प्रभाकर ने बताया कि बाबा जी साहित्य एवं संगीत के लिए के भी विशेष प्रेमी थे. उन्होंने अपने जीवन काल में अनेक पुस्तकों की रचना की. साथ ही भजनावली कृष्ण भजनावली शिव एवं शक्ति पर आधारित कई गीतों की रचना की है. उनके द्वारा रचित गीत को आज भी लोग श्रद्धा पूर्वक स्मरण करते हैं. आचार्य प्रभाकर ने बताया कि संत लक्ष्मी नाथ गोसाई की प्रेरणा एवं उनके आशीर्वाद से यह कठिन यात्रा संभव हो पाता है.
रास्ते में आचार्य प्रभाकर द्वारा छोड़ब नहि तोहर खड़ाऊ हो बाबा, जपते रहब तोहर नाम, बाबा आहांक महिमा बच्चे सं हम जनै छी, एवं अनाथ के नाथ कहाबी बाबा लक्ष्मी नाथ, चल कमरिया सब बैकुंठ धाम परसरमा भजन गाकर उन्होंने यह यात्रा पुरी की. इस यात्रा के दौरान ग्रामीण एवं बाबा जी के भक्तों ने सराहनीय योगदान दिया.






