Patna: बिहार के सीवान में एक ग्रामीण परिवार की महिला मिंता देवी को उस समय एक अजीबोगरीब झटका लगा जब कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा और उनकी टीम ने उनके चेहरे वाली टी-शर्ट पहनकर सुर्खियां बटोरीं. 35 वर्षीय मिंता देवी कांग्रेस के “वोटर चोरी” अभियान में एक और मील का पत्थर बन गई हैं, क्योंकि मतदाता सूची में उनकी उम्र 124 वर्ष दर्ज है.
प्रियंका ने चुनाव आयोग की इस गलती पर बड़े सवाल उठाए हैं और कहा है कि मतदाता सूची में नाम, परिवार के पते जैसी कई जानकारियां फर्जी हैं. सीवान के दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत मिंता देवी का मीडिया ने पता लगाया. उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैं एक गृहिणी हूं, मुझे इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल और मोहरा बनाए जाने का दुख है. मेरी बस एक ही गुजारिश है कि मेरी मतदाता पहचान पत्र में सुधार किया जाए.”
मिंता देवी ने कहा कि उनका परिवार, जो वर्तमान में छपरा के प्रभुनाथ नगर में रहता है, इस अचानक प्रचार से बचने के लिए परेशान हैं. यह उनके परिवार – पति, बच्चों और ससुराल वालों – के लिए मानसिक यातना जैसा है. उन्होंने कहा “प्रियंका गांधी कौन होती हैं मेरी तस्वीर टी-शर्ट पर छापकर उसे पहनकर मेरा लिए विरोध करने वाली? मैं सुबह से ही परेशान हूं. लोग मुझे फोन कर रहे हैं. पत्रकार मेरे दरवाजे पर आ रहे हैं.”
गलती कैसे हुई, यह बताते हुए उन्होंने कहा कि वोटर आईडी कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1900 दर्ज है. आधार कार्ड में उनकी जन्म तिथि 1990 है. उन्होंने कहा कि वह अपने वोटर आईडी कार्ड में हुई गलती को ठीक करवाना चाहती हैं. उन्हें दो दिन पहले ही इस गलती के बारे में पता चला था. उन्होंने कहा, “लेकिन प्रियंका गांधी का इससे कोई लेना-देना नहीं है. वह इसमें दखल क्यों दे रही हैं?” उन्होंने कहा कि वोटर आईडी कार्ड में हुई गलती उनकी गलती नहीं है. उन्होंने आगे कहा, “वह मेरा लिए विरोध क्यों कर रही हैं?”
जब उनसे पूछा गया कि प्रियंका गांधी वाड्रा उनके समर्थन में चुनाव आयोग से लड़ रही हैं, तो उन्होंने कहा, “यह कैसा समर्थन है? उन्होंने मेरा चेहरा और नाम पहना हुआ है. उन्होंने मेरा पता सार्वजनिक कर दिया है. उन्हें मेरा समर्थन क्यों करना चाहिए? वह मेरे लिए कौन हैं? वह मेरी रिश्तेदार नहीं हैं.” परिवार ने चुनाव आयोग से इस गलती को जल्द से जल्द सुधारने की अपील की है, ताकि उनकी प्रतिष्ठा बनी रहे.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बिहार में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि कई “अपात्र व्यक्ति” मतदाता पहचान पत्र हासिल करने में सफल रहे हैं क्योंकि 2004 के बाद से एसआईआर समय-समय पर आयोजित नहीं किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि “कई लोग” जाने-अनजाने में विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के कई मतदाता पहचान पत्र अपने पास रखने में कामयाब रहे हैं.
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