Bihar SIR: मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों को सार्वजनिक करें, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा

By: Rahul Kumar

On: Thursday, August 14, 2025 4:52 PM

Google News
Follow Us

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख लोगों के नाम, हटाने का कारण बताते हुए, चुनाव आयोग की वेबसाइटों पर अपलोड किए जाएं. अदालत ने यह भी कहा कि इस सूची का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि हर मतदाता इसे देख सके.

बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव आयोग ने कहा है कि सूची से हटाए गए 65 लाख नामों में से 22 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है. उन्होंने कहा, “अगर 22 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो इसका खुलासा बूथ स्तर पर क्यों नहीं किया जाता? हम नहीं चाहते कि नागरिकों का अधिकार राजनीतिक दलों पर निर्भर हो.”

अपने आदेश में, पीठ ने कहा, “हमने भारत के चुनाव आयोग को संक्षेप में सुना है. सुनवाई के दौरान, इन कदमों पर सहमति बनी है: चुनाव आयोग, अंतरिम उपाय के रूप में, निम्नलिखित कदम उठाएगा: 65 लाख मतदाताओं की सूची, जिनके नाम 2025 की सूची में थे, लेकिन मसौदा सूची में शामिल नहीं हैं, जिला स्तर की वेबसाइटों पर प्रदर्शित की जाएगी.

आदेश में कहा गया है कि इस सूची में ड्राफ्ट रोल से नाम हटाने का कारण भी बताना होगा. आदेश में कहा गया है कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार उन स्थानीय भाषा के समाचार पत्रों में किया जाएगा जिनका प्रसार सबसे ज़्यादा है और इसे दूरदर्शन व अन्य चैनलों पर प्रसारित किया जाना चाहिए. जिला निर्वाचन अधिकारी, अगर उनका सोशल मीडिया हैंडल है, तो वहां भी यह सूचना प्रदर्शित करेंगे.

न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति अपने आधार कार्ड की प्रति के साथ अपने दावे प्रस्तुत कर सकते हैं. इसके अलावा, सभी पंचायत भवनों और प्रखंड विकास एवं पंचायत कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर 65 लाख मतदाताओं की बूथवार सूची भी प्रदर्शित की जाएगी ताकि लोगों की सूची तक मैन्युअल पहुंच हो.

इससे पहले, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद तैयार की गई मसौदा सूची में कितने मतदाताओं के नाम छूट गए हैं. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने जवाब दिया, 65 लाख नाम सूची में नहीं हैं, 22 लाख मृत हैं.

द्विवेदी ने ज़ोर देकर कहा कि कोई भी नाम नहीं हटाया गया है और जो कोई भी जीवित है, लेकिन मृत्यु के आधार पर उसका नाम सूची से हटा दिया गया है, वह इसे ठीक कराने के लिए चुनाव अधिकारियों से संपर्क कर सकता है. न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि हम और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. हम कह रहे हैं कि इसके बजाय, पूरा डेटा वेबसाइट पर डाल दिया जाए.

न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की अपनी विचारधारा होगी, लेकिन लोगों को स्वतंत्र रूप से अपने नामों की ऑनलाइन जांच करने में सक्षम होना चाहिए. पीठ ने कहा कि पूरा डेटा सेट ऑनलाइन होना चाहिए. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि अनीता देवी को पता होना चाहिए कि अगर मैं इस वेबसाइट पर जाऊंगी, तो मुझे पता चल जाएगा कि मेरा नाम कैसे मिलेगा. अदालत ने यह भी कहा कि यह सूची खोज योग्य होनी चाहिए और लोग अपने ईपीआईसी नंबरों का उपयोग करके इसे देख सकें. मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी.

ये भी पढ़ें-

Bihar SIR: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बिहार एफआईआर प्रक्रिया मतदाता अनुकूल, 7 से बेहतर हैं 11 दस्तावेज

आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं: बिहार SIR पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने किया चुनाव आयोग का समर्थन

मतदाता सूची पुनरीक्षण, सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर चुनाव आयोग ने दिया ये जवाब, आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment