- रिपोर्ट- फिरोज अहमद
Darbhanga: मिथिला खासकर दरभंगा मधुबनी जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में डबल इंजन की एनडीए सरकार प्रतिबद्ध है. कोसी नहर परियोजना के आधुनिकीकरण इसके विस्तारीकरण और नवीनीकरण के लिए बिहार कैबिनेट से 7832.29 करोड़ की राशि का स्वीकृत होना इसका ज्वलंत उदाहरण है.
दरभंगा के सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने दरभंगा और मधुबनी में सिंचाई की सुव्यवस्थित व्यवस्था यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए बिहार की एनडीए सरकार के पहल की जमकर सराहना करते हुए कहा कि 1962 में 13 करोड़ की लागत से शुरू किए गए यह योजना केंद्र और बिहार की यूपीए सरकार की उपेक्षा के कारण पूरी नहीं हो सकी थी लेकिन वर्तमान केंद्र की मोदी सरकार तथा बिहार की नीतीश सरकार द्वारा इस योजना को पूरा करने के लिए बजटीय प्रावधान किए जाने से आने वाले समय में दरभंगा और मधुबनी फिर से धान का कटोरा के रूप में स्थापित हो जायेगा.
सांसद डॉ. ठाकुर ने कोसी नहर परियोजना की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि 1962 में जिस योजना की घोषणा हुई और 1973 में जिसका डीपीआर बनकर तैयार हुआ. वैसी योजनाओं के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 2023 में 19 सौ करोड़ का प्रावधान कर आगे बढ़ाया. अब बिहार की डबल इंजन सरकार ने अपने कैबिनेट की बैठक में जिस तरह से इतनी बड़ी राशि को स्वीकृत किया उससे साबित हो जाता है कि दरभंगा और मधुबनी का समग्र विकास पीएम मोदी और सीएम नीतीश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है.
सांसद डॉ. ठाकुर ने इस परियोजना के आधुनिकीकरण के लिए बिहार सरकार के निर्णय को किसानों के हित में दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इसके पूरा हो जाने के बाद दरभंगा के 18 प्रखंड और मधुबनी के 20 प्रखंडों के किसान सिंचाई के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएंगे. फलस्वरूप इन दोनों जिलों में तीन से चार फसलों का पैदावार होना शुरू हो जाएगा.
सांसद ने इस परियोजना को दूरगामी और लाभदायक बताते हुए कहा कि भीमनगर कोसी बैराज से निकलने वाली इस नहर की पटवन क्षमता अभी दो लाख सत्तर हजार की है, जबकि इसके विस्तारीकरण, पुनर्स्थापन एवं आधुनिकीकरण हो जाने पर इसकी क्षमता दो गुणी से ज्यादा हो जाएगी जो इन दोनों जिलों के लिए वरदान साबित होगा.
सांसद ने इस परियोजना से होने वाले फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेपाल भाग के लगभग 35 किलोमीटर और भारतीय क्षेत्र में आवश्यकतानुसार दरभंगा मधुबनी के हर क्षेत्र में पचास हजार हेक्टेयर में इससे सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी जिसे 2029 तक इस परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा.
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