- रिपोर्ट- विकास कुमार
Saharsa: सहरसा में कोसी नदी मानसून आते ही अपने रौद्र रूप में है. कोसी नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव जारी है. कोसी नदी के कटाव से ग्रामीण परेशान हैं. कोसी नदी जब उफनाती है तब कोस तटबंध के अंदर बसे लोगों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ता है, जब कोसी नदी का जल स्तर घटता है तो कटाव का सामना करना पड़ता है.
भगवान भरोसे हैं पीड़ित
ऐसे में कोसी नदी में सैकड़ों घर विलीन हो जाता है. हालांकि इससे बचाव के लिए फ्लड फाइटिंग भी जल संसाधन विभाग द्वारा किया जाता है. लेकिन जब जल संसाधन विभाग अपनी जिम्मेवारी से खुद भागे तो कटाव पीड़ित तो भगवान भरोसे ही है.

नदी में समाए कई घर
दरअसल, सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के घोघसम गांव में कोसी नदी का कटाव भयावह रूप से जारी है. तीन दर्जन से ज्यादा घर कोसी नदी में विलीन हो गया और लगभग चार से पांच दर्जन घर अभी भी कोसी नदी के मुहाने पर खड़ा है. जो कोसी नदी में विलीन हो जायेगा. लोग अपना आशियाना खुद से उजाड़ने में लगे है लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेवारी से भागते नजर आ रहे हैं.

घर बचाने में अधिकारी असमर्थ
जब कटाव स्थल का निरीक्षण करने जा रहे जल संसाधन विभाग के एसडीओ प्रवेश कुमार और जूनियर इंजीनियर मणिकांत कुमार से सवाल किया गया तो उनका साफ साफ कहना था जो भी सवाल पूछना हो वरीय अधिकारी से पूछिए. उन्हें सिर्फ स्थल निरीक्षण करना है. उनका काम तटबंध की सुरक्षा करना है न कि किसी के घर को कटने से बचाना है. अब सवाल उठता है तटबंध की सुरक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है इस बात को मानते हैं तो फिर फ्लड फाइटिंग कर कटाव रोकने की जिम्मेवारी किसकी है.
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