- संवाददाता- फिरोज अहमद
Darbhanga: भाकपा (माले) के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने एक बयान जारी कर विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Bihar SIR) प्रक्रिया में व्याप्त भारी अराजकता और प्रशासनिक मनमानी पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि पूरे राज्य से मिल रही रिपोर्टों से यह स्पष्ट हो रहा है कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन का रवैया पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है.
बैद्यनाथ यादव ने कहा कि जिस प्रकार आनन-फानन में SIR की प्रक्रिया चलाई जा रही है, उससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि चुनाव आयोग ने पहले से ही लाखों लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने का मन बना लिया है.
उन्होंने कहा कि 26 जुलाई की अंतिम तिथि अभी शेष है, लेकिन अभी से अधूरी और त्रुटिपूर्ण सूचियां जारी कर दी गई हैं. जिला के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि मतदाताओं के नामों से जुड़े फॉर्म उनकी जानकारी के बिना भर दिए गए हैं. उन्हें यह भी नहीं मालूम कि उनमें क्या सही है और क्या गलत. भाजपा के कार्यकर्ता BLO के साथ मिलकर घर-घर जाकर बिना पारदर्शिता के यह काम कर रहे हैं.
माले जिला सचिव ने चेताया कि
यह पूरी प्रक्रिया न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि प्रशासन BLO कर्मचारियों पर दबाव डालकर आंकड़े जुटाने को विवश कर रहा है. यह मतदाता अधिकारों का खुला उल्लंघन है. सवाल यह है कि चुनाव आयोग इतनी हड़बड़ी में क्यों है? आखिर मतदाताओं को अपनी पहचान और अधिकार सिद्ध करने का पर्याप्त समय क्यों नहीं दिया जा रहा?
उन्होंने आगे कहा कि जब पूरा बिहार बाढ़ की चपेट में है, तब गरीब, दलित, महिला, अल्पसंख्यक और आमजन अपनी जान बचाने में लगे हैं. ऐसे में उनसे दस्तावेज़ लाकर मतदाता सूची में नाम सत्यापित करने की अपेक्षा करना अमानवीय है.
भाकपा (माले) की SIR प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग करती है. दलित, वंचित, महिला और अल्पसंख्यक मतदाताओं के अधिकारों की पूरी रक्षा की जाए. भाकपा (माले) ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रक्रिया की अव्यवस्था और अलोकतांत्रिक पहलुओं के खिलाफ जनप्रतिरोध खड़ा करेगी और राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी. पारदर्शी और समावेशी लोकतंत्र के लिए यह संघर्ष जरूरी है.
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