Patna: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को नए वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ में सुनवाई चल रही है. खंडपीठ के दूसरे जज जस्टिस ऑगस्टिन जार्ज हैं. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है. उन्होंने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को कहा कि संविधान के उल्लंघन का ठोस सबूत लाइए, तभी हस्तक्षेप होगा.
ठोस सबूत लाने पर ही होगा हस्तक्षेप
केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रहे हैं. वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी दलील दे रहे हैं. वक्फ संशोधन कानून पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. उन्होंने याचिकाकर्ताओं को कहा कि संसद से पारित कानून में संवैधानिकता की धारणा होती है और कोई कानून संवैधानिक नहीं है, इसका जब तक कोई ठोस मामला नहीं आता, अदालतें इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है.
केंद्र की तीन मुद्दों पर सुनवाई का आग्रह
केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन मुद्दे चिन्हित किए थे, अपने हलफनामा में इन्हीं तीन मुद्दों के जवाब दाखिल किया है. जबकि याचिकाकर्ता चाहते हैं कि इन तीन मुद्दों के अलग भी कई अन्य मुद्दों पर सुनवाई हो. तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से इन्हीं तीन मुद्दों तक सुनवाई को सीमित रखने का आग्रह किया. कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया और कहा कि महत्वपूर्ण कानून पर टुकड़ो में सुनवाई नहीं हो सकती. सिब्बल ने कहा कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन करता है.
रजिस्ट्रेशन को लेकर सीजेआई ने ली चुटकी
वक्फ संशोधन कानून पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि पुराने अधिनियम में Shall शब्द का इस्तेमाल किया गया था. इस पर सीजेआई ने कहा कि केवल Shall शब्दों के प्रयोग से पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं हो सकता, ऐसा नहीं करने पर परिणाम क्या होगा, इसका कोई प्रावधान था? फिर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि एक्ट में सिर्फ इतना कहा गया है कि जो मुत्तवल्ली ऐसा नहीं करता, वह अपना अधिकार खो देता है. फिर चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि हम पूछ रहे हैं कि क्या प्रासंगिक समय के अधिनियमों के तहत वक्फ घोषित की गई संपत्ति का पंजीकृत होना अनिवार्य या आवश्यक था. इस पर सिब्बल ने कहा कि 1954 के बाद वक्फ कानून में जितने भी संशोधन हुए, उनमें वक्फ प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था.






