सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले की सुनवाई, रोक लगाने के लिए 10 से अधिक याचिका

By: Hemlata Karn

On: Thursday, July 10, 2025 9:36 AM

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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले में आज यानी कि 10 जुलाई को सुनवाई होगी. अदालत ने विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं, गैर सरकारी संगठनों और वकीलों की 10 से अधिक याचिकाओं को सूचीबद्ध किया है. न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण मामले की सुनवाई होगी.

इन्होंने दायर की है याचिका

इस दौरान पक्ष और विपक्ष में दलीलें सुनी जाएंगी. चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए इस अभियान पर फिलहाल रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी. सुनवाई के लिए सूचीबद्ध और एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज झा, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अरशद अजमल, गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की याचिकाएं शामिल हैं. अदालत ने मतदाता सूची संशोधन का समर्थन करने वाली अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका को भी सूचीबद्ध किया है.

संशोधन को रोकने की मांग

याचिकाओं ने तर्क दिया गया है कि पुनरीक्षण की घोषणा करने वाली 24 जून की अधिसूचना पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश आवश्यक है, क्योंकि समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों से आने वाले करोड़ों मतदाताओं पर अपने निवास को साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कड़ा दबाव डाला जा था, अन्यथा उन्हें मताधिकार से वंचित होने की संभावना का सामना करना पड़ सकता था.

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई थी. यदि समय पर फॉर्म जमा नहीं किए गए तो आवेदकों के नाम 1 अगस्त, 2025 को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे.

मनोज झा की ये अपील

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि चुनाव आयोग को बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के गलत समय पर और जल्दबाजी में संचालन के पीछे के तर्क को स्पष्ट करना चाहिए. मनोज झा ने तर्क दिया है कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से पूर्व परामर्श किए बिना यह निर्णय लिया और इसका इस्तेमाल मतदाता सूचियों के आक्रामक और अस्पष्ट संशोधनों को उचित ठहराने के लिए किया जाएगा, जो मुस्लिम, दलित और गरीब प्रवासी समुदायों को असंगत रूप से निशाना बनाते हैं.

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