- रिपोर्ट- विकास कुमार
Saharsa: एक और जहां बढ़ते क्राइम को लेकर सरकार की किरकिरी हो रही है. बीते दिनों पटना में गोपाल खेमका, सिवान में ट्रिपल मर्डर सहित अन्य जिलों में हो रही लगातार घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ हे रहे हैं वहीं विपक्ष बढ़ते क्राइम को लेकर सरकार को घेरने में लगी है. वहीं, सहरसा पुलिस की धक्का मार गाड़ी के कारण किरकिरी हो रही है. क्राइम कंट्रोल के लिए सरकार थानों में गाड़ी की कमी भी नहीं है. कमी है तो गाड़ी के रखरखाव और मेंटेनेंस की.
पटरी के बीचो-बीच फंसी पुलिस की गाड़ी
जी हां हम बात कर रहे है सहरसा के धक्का मार पुलिस गाड़ी की, जिसे कभी सदर थाना की एक गाड़ी दूसरे गाड़ी को टोचन कर रहा है तो कभी धक्का मारकर किसी तरह थाना तक ले जाने का काम कर रहा है. इसी दौरान बंगाली बाजार स्थित रेलवे ढाला के समीप टोचन रेलवे पटरी के बीचों बीच खुल गया. टोचन काफी मशक्कत के बाद जब नहीं लगा तो रेलवे पटरी के बीचों बीच धक्का मारकर ढाला से बाहर निकाला गया.

धक्का मार गाड़ी से कैसे होगा क्राइम कंट्रोल
गनीमत थी कि उस वक्त कोई ट्रेन नहीं थी. नहीं तो हादसा भी हो सकता था. फिर जाकर किसी तरह सहरसा सदर की पुलिस की खराब गाड़ी सदर थाना तक पहुंच पाई. ऐसे में सरकार का क्राइम कंट्रोल पर किए जाने वाले दावों का पुलिस वाले और उसकी खराब गाड़ी हवा निकलती नजर आ रही है. क्या ऐसे में क्राइम कंट्रोल हो पायेगा?
ये भी पढ़ें-
सहरसा में मुहर्रम जुलूस में भगदड़, पुलिस की सारी तैयारी फेल, वीडियो हो रहा वायरल
सहरसा में पिकअप-ऑटो में टक्कर, पंजाब कमाने जा रहे दो मजदूर की मौत, आधा घायल






